Wednesday, 12 August 2026

लूट की यह योजना किस ‘अमित शाह’ ने बनाई

   यह सरकार मार पड़ने पर इस्तीफे ही नहीं देती हैघमंड में उठाया अपना क़दम भी वापस लेती है. सौजन्यता नहीं है इसके पासइसलिए माफी नहीं मांगती है. यूपीआई भुगतान के बारे में टेढ़ा मुंह बना कर जो सारा शुल्क हम पर दे मारा था अभी-अभी इसनेजब चौतरफा मार पड़ी तो उसे वापस ले लिया लेकिन कुछ इस तरह जैसे कुछ हुआ ही न हो ! 

   सारा देश पूछ रहा है कि जंतर-मंतर पर पुलिसिया हैवानियत का आदेश किसने दिया था जवाब कोई नहीं दे रहा है. इस सरकार के एक सत्वहीन मंत्री की बात को यदि थोड़ा बदल कर कहूं तो इस सरकार में जवाब नहीं दिए जाते हैं. एक मंत्री लगा रखा है भाई लोगों नेसंसदीय कार्यमंत्रीजो रोज अपनी भी और पार्टी की भी किरकिरी करवा रहा है लेकिन एक वाक्य में यह नहीं बता पा रहा है कि देश का गृहमंत्री कहां गायब है. छोटा-सा प्रश्न जवाब न मिलने से बड़ा-से-बड़ा होता जा रहा है और कल तक जो सरकार 56 इंच की बनी फिरती थीक्षुद्रतर होती जा रही है. 

   देश की अर्थमंत्री निर्मला सीतारमन से जितने अनर्थ करवाए जा रहे हैंउनकी अब गिनती करनी भी हमने छोड़ दी है. हमने गिनना छोड़ दिया हैलेकिन निर्मलाजी ने गलतियां करना थोड़े ही छोड़ा है ! सो एकदम ही अर्थहीन हो चुकी संसद में उन्होंने टैक्सेशन एंड अदर लॉस (एमेंडमेंट) बिल पेश कर दिया. सरकार को पता था कि इस पर कोई बहस नहीं होगीक्योंकि विपक्ष जब इस सरकार के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर रहा हैतो वह इसके कारनामों पर बहस क्यों करेगा !

   डॉक्टर लोहिया ने कहा था: जब सड़कें सूनी हो जाती हैंतब संसद आवारा हो जाती है. इसी वजन की एक दूसरी बात भी कही जा सकती है : जब संसद गूंगी हो जाती हैतब लोक बोलने लगता है. वह बोल रहा है और इतनी जोर से बोल रहा है कि सरकार ने अपने कान व दिमाग बंद कर लिए हैं. इसलिए मैं यह सवाल उठा रहा हूं कि निर्मलाजी ने यह जो बिल पेश कियाइस बिल का जनक कौन है वे स्वयं नहीं हैंयह तो मैं जानता हूं. लेकिन हर उपभोक्ता कोहर स्तर पर कैसे निचोड़ा जाएइसकी यह काइयां योजना वित्त मंत्रालय के किस अधिकारी ने बनाई थीमैं यह जानना चाहता हूं. मैं जानना चाहता हूं कि इस योजना का अमित शाह’ कौन है क्या निर्मलाजी बताएंगी या उनके भीतर भी कोई किरण रिजूजू जाग गया है जो बहुत बोलेगा लेकिन मतलब का एक जवाब नहीं देगा ?

   यह बिलजो अब कानून बन गया हैकहता है कि यूपीआईरूपे या डेबिट कार्ट या ऐसी किसी भी माध्यम से आप जो भी भुगताने करेंगेउसकी फीस भी आपको चुकानी पड़ेगी. उस पर अब यह लीपापोती की जा रही है कि इसे या उसे फी नहीं लगेगीएकदम मुफ्त रहेगा यह. लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा सीधी बात कह रहे हैं कि इन सारी प्रक्रियाओं का खर्च तो आता ही हैखर्च आता है तो भुगतान भी किसी को तो करना ही होगा! संजय मल्होत्रा साहब से मेरा सवाल इतना ही है कि आप जिसे किसी को’ कह कर पतली गली से निकल जाना चाहते हैंवह हम ही क्यों हैं 

   ईमानदारी की बात यह है कि बैंकों का यह सारा जंजाल आपने खड़ा किया है. हम तो अपनी थोड़ी-बहुत आय और बहुत सारे खर्च का संतुलन बिठाते-बिठाते ही दोहरे हुए जा रहे थे. जो थोड़ा-बहुत अगली फ़सल या ज़रूरत के लिए बचा पाते थे वह घर में ही रखा रहता था. बैकों का यह सारा जाल आपने बुना ताकि हमारे घर में बचे-रखे पैसों तक भी आपकी पहुंच बन सके. पैसों से पैसे बनानापैसों वालों तक पैसा पहुंचाना आपकी योजना थीहमारी नहीं. हम अपना पैसा लेकर बैंकों में आ जाएंइसके लिए कितनी कसरत की आपने ! तरह-तरह प्रलोभन दिए आपनेहमें सुरक्षा व व्याज का लालच दिया. हमारा पैसा हमारे देश के विकास में लगाया जाएगायह प्रलोभन भी कम नहीं था. हम फंसते गएआप फंसाते गए. फिर भी हमारा रिश्ता आमने-सामने का था. हम नियमित बैंक जाते थेआमने-सामने बैठ कर अपना काम निबटाते थेअपने पासबुक में अपना पैसा दर्ज करा कर लौटते थे. 

   हमने कहां कहा कि हमें कोई तकलीफ है! आपने ही कहा कि हम आपकी तकलीफ़ कम करना चाहते हैं. अब आपको पासबुक ढोना नहीं होगाहम आपको स्टेटमेंट भेजेंगे. फिर वह स्टेटमेंट कागज से इलेक्ट्रोनिक कर दिया आपने. हमसे पूछा भी नहीं कि भाईआपकी इलेक्ट्रोनिक पहुंच है भी कि नहीं हम चुप रहेक्योंकि तथाकथित आधुनिकता दूसरा कुछ करे या न करेडराती बहुत है. आपने बैंकों का अपना महल खड़ा करना शुरू किया और हमें किनारे करने लगे. हम यह देख तो रहे थेसमझ कम पा रहे थे. आपने हमारा सारा पैसा अपनी मुट्ठी में कर लिया. ऐसा हाल कर दिया आपने कि हम अपना पैसा निकालना चाहें तो आपका रवैया ऐसा होता है जैसे हम खैरात मांग रहे हैंकि किसी दूसरे का पैसा उड़ाने की फिक्र में हैं हम. काउंटर के उस तरफ बैठा आदमी कब आदमी नहींमशीन बन गयाहम पहचान नहीं सके. अब वह बात नहीं करता हैफॉर्म थमाता है. वह हमेशा ही चाय पीनेमोबाइल पर बतियाने या लंबे लंच पर रहता है जबकि हम कतार में लगा दिए जाते हैं. हमने यह भी देखा कि बैंकों की सूरत संवरती जा रही हैउनका मकान ऊंचा व चमकदार होता जा रहा है. वेतन-भत्ता बढ़ाने की अंतहीन मांगें व बैंकों के हड़ताल पर जाने का नजारा भी हम देखते रहे. 

   फिर हमने देखा कि आपने हमें जितने भी प्रलोभन दिए गए थेवे एक-एक कर वापस लिए जाने लगे. हमें अपना ही पैसा किश्तों में मिलने लगाहमारे ही पैसों में विभिन्न कारणों से कटौती की जाने लगीफिर हमसे बिना पूछेमीनिमम बैलेंस की तलवार हमारे ऊपर चलाई गईफिर कहा गया कि पैसे चेक से निकालते हो तो उस चेक की कीमत भी आपको देनी होगीकि आप दिन में इतनी बार ही पैसा निकाल सकते होअपने पैसे का ड्राफ्ट बनवाया तो उसकी क़ीमत अलग से देनी होगी. आपने सूदखोरी पर कानूनी बंदिश लगाई ताकि सरकारी सूदखोरी निर्बाध चल सके. 

   हमने कहां मांगा था कि हमें एटीएम मशीन लगा दो आपने लगाईहमारी सुविधा के लिए नहींअपनी कमाई बढ़ाने के लिए. उस मशीन से आपने अपना किराया बचायाआदमी रखने का खर्च बचाया. जब हमने आपकी यह मनमानी क़बूल कर ली तो आपने धीरे से उस मशीन का पैसा वसूलना शुरू कर दिया. बैंकों की व्याज-दर कम-से-कम होती गईऔर आप हमारे ही पैसों से खुले बाजार में सट्टा खेल-खेल कर करोड़ों-अरबों बनाने लगे. आपने इतनी इंसानियत भी नहीं दिखाई कि जिसके पैसों पर ऐश कर रहे होउसे अपनी कमाई में हिस्सेदारी भी दें. बैंक अधिकारियों के लगातार बढ़ते वेतन-भत्ते देखोउनकी दूसरी सारी सुविधाएं देखोउनमें कदम-कदम पर पनपता भ्रष्टाचार देखो और फिर हिसाब लगाओ कि बैंक खाताधारकों के हित में हैं कि सत्ता के लिए दुधारू गाय हैं तुम आसानी से समझ सकोगे कि यह सत्ता व संपत्ति का भयंकर गठजोड़ है. 

   फिर एक सुबह किसी क्षद्मधारी ने घोषणा कर दी कि आज से नकद खरीद-भुगतान बंद करोइलेक्ट्रोनिक विधि अपनाओ. नहीं भाई नहींहमें नकद खरीद-फरोख्त में कोई परेशानी नहीं थी. तुम्हें थी कि तुम हम पर वैसा काबू नहीं कर पा रहे थे जैसा तुम चाहते थे. हमारा पैसा व हम आजाद रहेंइससे तुम्हें परेशानी थी. तुमने अपने पंजे में हमारा सब कुछ समेट लेने के इरादे से इलेक्ट्रॉनिक भुगतान हम पर लाद दिया. यह भी हमने निभाया. अब निर्मला बहन कह रही हैं कि आपको इस सुविधा की कीमत भी देनी होगी. कैसी सुविधा कोई हमें समझाए कि हमारे पैसों की भीख आपने मांगी थीआपने देश के विकास की कसमें खाई थींआपने कहा था कि इन पैसों से सट्टा नहीं खेलेंगेआपने कहा था कि आप जब चाहेंगे अपना पैसा निकाल सकेंगेआपने कहा था कि हम आपके पैसे पर व्याज भी देंगे. वह सब हवा हो गया. हमारा पैसा आपकी मुट्ठी में हर तरह से बंद होता गया. अब आप उस मशीन का पैसा भी हमसे वसूल रहे हैं जिसकी हमने मांग भी नहीं की थी ! 

   तुम अपनी सुविधाएं सब वापस ले लोहमारा पैसा सारा हमें लौटा दो और फिर दिखाओ हमें पैसा कमाने की अपनी कला ! तुम्हारा निकम्मापन तो ऐसा है कि अपनी एक योजना भी ठिकाने से बना-चला नहीं सकते होतुम्हारे बनाए भवन व पुल व रास्ते सब बनते नहीं हैं कि धराशाय़ी हो जाते हैं ! ठेकेदारों पर कभी-कभार जुर्माना तो होता हैठेकेदारों के ठेकेदार पर कभी जुर्माना हुआ है आज तक किसी एक सरकार ने भी अपने ऐसे निकम्मेपन का हर्जाना सार्वजनिक कोष में जमा किया है कहां से करोगे कि तुम्हारे पास एक धेला भी ऐसा नहीं है कि जो हमारा नहीं है. तुम्हारा अस्तित्व हमारे वोट से हैतुम्हारा वैभव हमारे नोट से है. और तब निर्मला बहन किसे आंखें दिखा रही हैं जब सारी नकदी अपनी मुट्ठी में करनी थी तब रात के अंधेरे में नोटबंदी की महामूर्खता कीजब मध्यम रोजगार-धंधे को खत्म कर व्यापार-धंधे पर एकाधिकार करना था तब जीएसटी का काला क़ानून लाद दिया. लेकिन निर्मला बहन को मालूम हो कि न मालूम होपैसों से झूठ बोला जा सकता हैपैसा कभी झूठ नहीं बोलता है. वह आज फिर यह सच बोल रहा है कि देश के अर्थतंत्र पर निर्मला बहन व उनके भाइयों का कोई काबू नहीं है. वह ऐसी कटी पतंग है जो कभी डॉलर तो कभी रूबल की तरफ़ उड़ती है और दोनों उसे जब चाहें लूट लेते हैं. यह कोई अर्थतंत्र हुआ क्या ?

   बात यहां पहुंच गई है. यूपीआई से भुगतान हम करें या न करेंजवाब आपको देना ही होगा कि इस योजना का अमित शाह’ कौन है ? ( 11.08.2026)

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